राज्यपाल की न्यायिक शक्तियां और वित्तीय शक्तियां (Governor’s judicial powers and financial powers)

वित्तीय शक्तियां (Financial powers)

राज्यपाल की वित्तीय शक्तियां एवं कार्य निम्नलिखित हैं –

  1. राज्यपाल की सिफारिश के बिना कोई भी धन विधेयक विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता अर्थात विधानसभा से धन की मांग राज्यपाल की सिफारिश पर ही हो सकती है|
  2. वार्षिक बजट राज्यपाल वित्त मंत्री द्वारा विधानसभा में पेश करवाता है कोई भी बजत अनुदान मांग बिना राज्यपाल की अनुमति के प्रस्तुत नहीं हो सकता|
  3. राज्य की आकस्मिक निधि पर राज्यपाल का ही नियंत्रण है यदि संकट के समय आवश्यकता पड़े तो राज्यपाल इसमें आवश्यकतानुसार व्यय कर लेता है तथा उसके पश्चात राज्य विधानमंडल से उसकी स्वीकृति ले लेता है|
  4. पंचायतों और नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति की हर 5 वर्ष बाद समीक्षा के लिए वह वित्त आयोग का गठन करता है|

राज्यपाल की न्यायिक शक्तियां (Judicial powers of the governor)

राज्यपाल को निम्नलिखित न्यायिक शक्तियां प्राप्त हैं –

    1. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति राज्यपाल करता है|
    2. राज्यपाल यदि समझे की किसी न्यायालय के पास काम अधिक है तो वह आवश्यकतानुसार अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है|

  1. राज्यपाल उस अपराधी के दंड को क्षमा कर सकता है, घटा सकता है तथा कुछ समय के लिए स्थगित कर सकता है, जिससे राज्य के कानून के विरुद्ध अपराध करने पर दंड मिला हो| वह इस अधिकार का प्रयोग उन विषयों में नहीं कर सकता जो संघ सरकार की कार्यपालिका के अधीन हो| राज्यपाल अपनी इस शक्ति का प्रयोग भी मुकदमे की सुनवाई के आरंभ से पूर्व, उसके बीच अथवा उसके पश्चात कर सकता है|

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